BEST 20+ Tulsidas Ke Dohe In Hindi 2020

Tulsidas Ke Dohe In Hindi

Tulsidas Ke Dohe In Hind

सुनि समुझहि जन मुहित मन मज्जहीं अति अनुराग ! लहहि चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयास !!

विधि हरि हर कवि कोविद वानी फहत साधु महिमा सकुवानी सो मोर सन कहि जात ना कैसे! साक बनिष्क गुन मुनि जन जैसे !!

बन्दो सन्त समानचित हित अनहित नहि कोय अन्जलि गत सुभ सुमान जिमि सम सुगंध कर दोय !!

सन्त सरल चित जगत हित जानि सुभाऊ सनेदु ! बाल विनय सुनि करि कृपा राम चरण रति देहु !!

ग्रह वेषज जल पवन पाई कुजोग सुजोग हो हि कुवस्तु सुवस्तु जग लखहि ही सुलच्छन लोग!!

जड़ चेतन जग जीव जात सकल राममय जानि बदौ सबके पद कमल सदा जोरि जुग पानि !!

देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गधर्व बंदौ किधर रचनिचच कृपा करहु अब सब !!

भाग छोट अभिलाष बड़ करउं एक विश्वास पैहि सुख सुनि सुजन सब खल करिहहि उपहास !!

भनिति मोरी सब गुन रहित बिस्व विहित गुन एक सो विचारि सुनहहि सुमति जिन्ह के विमल विवेक !!

प्रिय लागिहि अति सुबहि मन-भनिति राम जस सग!! दारू विचारू कि करइ कोऊ वदिअ मलय प्रसर !!

स्याम सुरभि पय विसद अति गुनद करहि साव पान गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहि सुनहि सुजान !!

Tulsidas Ke Dohe In Hind

मुनि मानिक मुकुता छवि जैसी अहि गिरि गज सिर न तैसी नृप किरीट तरूनी तनु पाई लहहि सफल सोभा अधिकाई !!

सारब सेस महेस विधि आगम निगम पुरान !!
नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरतर गान !!

अति अपार मे सरित बार जौ नृप सेतु कराहि !!
चढ़ी पिपोलिकाउ परम लघु विनु श्राम पारहिं जाहिं !!

सरल कवित फोरति विमल सोई आदरहिं सुजान !!

सहज वयर विसराइ रिपु जो सुनि फरहि वखान !!

सो न होइ विनु विमल मति मोहि मति बल अति योर !!

फरहु कृपा हरि जस कहउं पुनि पुनि करउं निहोर !!

सफल कामना हीन जे राम भक्ति भगति रसलीन !!

नाम सुप्रेम पियूप हृद तिन्हंहु किए मन मीन !!

Tulsidas Ke Dohe In Hind

निरगुन ते एही भांति वड नाम प्रभाउ अपार !!

कहउं नामु वाड नाम ते निज विचार अनुसार !!

सबरी गीघ सुसेकवनि सुगति दोन्ही रघुनाथ !!

नाम उघारे अमित फल वेद विदित गुन गाथ !!

नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु !!

जो सुमरित भयो भांग ते तुलसी तुलसीदासु !!

सठ सेवक कि प्रीति रूचि रखिहहि राम कृपालु !!

उपल किए जलजान नेहिं सचिव सुमति कपि भालु !!

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प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान !!

तुलसी कहुं न राम से साहिव सील निधान !!

राम अनंत अनत गुन अमित कथा विस्तार !!

सुनि आचरजुन मानिहहि जिन्ह के विमल विचार!!

जस मानस सेहि विधि भयउ जाग प्रचार जेहि हेतु !!

अव सोइ कहउं प्रसंग सब सुमिरि उमा वृषकेतु!!

पुलग वाटिका वाग वन सुख सुबिहग बिहारू !!

माली सुमन सनेह जल सीचत लोचन चारू !!

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