42+ BEST Mirza Ghalib Shayari In Hindi | मिर्ज़ा ग़ालिब की मशहूर शायरी (2021)

Mirza Ghalib Shayari In Hindi

नमस्कार साथियों स्वागत है आपका हमारी पोस्ट Mirza Ghalib Shayari In Hindi में हम आपके लिए लाये है Mirza Ghalib Shayari In Hindi मिर्जा असदुल्लाह बेग़ ख़ाँ ‘ग़ालिब’ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। भारतीय शायरों में वे शिरोमणि माने जाते हैं मिर्जा गालिब के शेरों शायरी में बहुत ही गहरी बात छुपी होती है जो समझ जाये उसका बेड़ा पार और जो न समझे वो नासमझ। Mirza Ghalib Shayari In Hindi हमने आपके लिए इंटरनेट पर ढूंढ ढूंढ कर एक जगह इकट्ठा किए ताकि आप इन शायरी को पढ़कर ढृढ़ता से जीवन में उतरे तो इन शायरी से आपकी जिंदगी बदल सकती है तो पढ़िए अपनी मातृभाषा हिंदी में बेस्ट

Mirza Ghalib Shayari In Hindi

1.इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया।
वर्ना हम भी आदमी थे काम के।।

मिर्जा ग़ालिब

2.उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़।
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।।

मिर्जा ग़ालिब

3.काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’।
शर्म तुम को मगर नहीं आती।।- मिर्जा ग़ालिब

4.दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है।
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।।- मिर्जा ग़ालिब

5.इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’।
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे।।- मिर्जा ग़ालिब

6.इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना।
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।।- मिर्जा ग़ालिब

7.दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई।
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई।।- मिर्जा ग़ालिब

8.दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ।
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।।- मिर्जा ग़ालिब

9.क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां।
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।।- मिर्जा ग़ालिब

10.कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में।
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते।।- मिर्जा ग़ालिब

11.हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले।
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।।- मिर्जा ग़ालिब

12.न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता।
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता।।- मिर्जा ग़ालिब

13.दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए।
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।।- मिर्जा ग़ालिब

15.हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ गालिब।
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते।।- मिर्जा ग़ालिब

16.नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को।
ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं।।- मिर्जा ग़ालिब

17.पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार।
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है।।- मिर्जा ग़ालिब

18.न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा।
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है।।- मिर्जा ग़ालिब

19.तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना।
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता।।- मिर्जा ग़ालिब

20.हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है।
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।।- मिर्जा ग़ालिब

21.वो चीज़ जिसके लिये हमको हो बहिश्त अज़ीज़।
सिवाए बादा-ए-गुल्फ़ाम-ए-मुश्कबू क्या है।।- मिर्जा ग़ालिब

22.ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं।
कभी सबा को, कभी नामाबर को देखते हैं।।- मिर्जा ग़ालिब

23.निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन।
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले।।- मिर्जा ग़ालिब

24.भीगी हुई सी रात में जब याद जल उठी।
बादल सा इक निचोड़ के सिरहाने रख लिया ।।- मिर्जा ग़ालिब

25.वो रास्ते जिन पे कोई सिलवट ना पड़ सकी।
उन रास्तों को मोड़ के सिरहाने रख लिया।।- मिर्जा ग़ालिब

26.हम जो सबका दिल रखते हैं।
सुनो, हम भी एक दिल रखते हैं।।- मिर्जा ग़ालिब

27.ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं।
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।।- मिर्जा ग़ालिब

28.तू मिला है तो ये अहसास हुआ है मुझको।
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है।।- मिर्जा ग़ालिब

29.उस पे आती है मोहब्बत ऐसे।
झूठ पे जैसे यकीन आता है।।- मिर्जा ग़ालिब

30.गुज़र रहा हूँ यहाँ से भी गुज़र जाउँगा।
मैं वक़्त हूँ कहीं ठहरा तो मर जाउँगा।।- मिर्जा ग़ालिब

31.एजाज़ तेरे इश्क़ का ये नही तो और क्या है।
उड़ने का ख़्वाब देख लिया इक टूटे हुए पर से।।- मिर्जा ग़ालिब

32.कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता।
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता।।- मिर्जा ग़ालिब

34.है और तो कोई सबब उसकी मुहब्बत का नहीं।
बात इतनी है के वो मुझसे जफ़ा करता है।।- मिर्जा ग़ालिब

35.इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब।
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।।- मिर्जा ग़ालिब

36.तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने “ग़ालिब।
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे।।- मिर्जा ग़ालिब

37.तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिला के दिखा।
नहीं तो दो घूँट पी और मस्जिद को हिलता देख।।- मिर्जा ग़ालिब

39.उल्फ़त पैदा हुई है , कहते हैं , हर दर्द की दवा।
यूं हो हो तो चेहरा -ऐ -गम उल्फ़त ही क्यों न हो।।- मिर्जा ग़ालिब

40.आया है मुझे बेकशी इश्क़ पे रोना ग़ालिब।
किस का घर जलाएगा सैलाब भला मेरे बाद।।- मिर्जा ग़ालिब

41.ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब ही है “ग़ालिब”।
अक्सर वहीँ से गुज़रता है जहाँ रास्ता नहीं होता।।- मिर्जा ग़ालिब

42.“ग़ालिब“ छूटी शराब पर अब भी कभी कभी ।
पीता हूँ रोज़-ऐ-अबरो शब-ऐ-महताब में।।- मिर्जा ग़ालिब

43.रात है ,सनाटा है , वहां कोई न होगा, ग़ालिब।
चलो उन के दरो -ओ -दीवार चूम के आते हैं।।- मिर्जा ग़ालिब

44.तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत नहीं है “ग़ालिब”।
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद।।

45.दर्द हो दिल में तो दबा दीजिये।
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिये।।

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आशा है कि आपने हमारी पोस्ट Mirza Ghalib Shayari In Hindi पढने आनन्द लिया होगा, जितना कि मुझे लिखते हुए मिला है। यदि कुछ ऐसी बातें हैं जो इसमें सम्मिलित नहीं हो पाई हैं, अवश्य टिप्पणी कर उल्लेख करें।

About Surendra Uikey

Surendra Uikey Is A Co-Founder Of Motivational Shayari. He Is Passionate About Content Writer Shayari, Quotes, Thoughts And Status Writer

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