21+ कर्बला शायरी | Karbala Shayari In Hindi (2021)

Karbala Shayari In Hindi

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारी इस नई पोस्ट Karbala Shayari In Hindi में आज हम आपके लिए लाये बेस्ट Karbala Shayari In Hindiआज हम बात करेंगे Karbala Shayari In Hindi

वैसे तो मुहर्रम कोई पर्व नहीं है, यह सिर्फ इस्लामी हिजरी सन्‌ का पहला महीना है। यह बेहद गम का मौका है. पूरी इस्लामी दुनिया में मुहर्रम की नौ और दस तारीख को मुसलमान रोजे रखते हैं और मस्जिदों-घरों में इबादत की जाती है. पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है ।इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम हिजरी संवत का प्रथम मास है मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है इस माह की उनके लिए बहुत विशेषता है. मुहर्रम एक महीना है जिसमें दस दिन इमाम हुसैन के शोक में मनाए जाते हैं इसी महीने में मुसलमानों के आदरणीय पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब, मुस्तफा सल्लाहों अलैह व आलही वसल्लम ने पवित्र मक्का से पवित्र नगर मदीना में हिजरत किया था।

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Karbala Shayari In Hindi

1.कर्बला की कहानी में कत्लेआम था लेकिन हौसलों के आगे हर कोई गुलाम था खुदा के बन्दे ने शहीद की कुर्बानी दी इसलिए उसका नाम पैगाम बना।।

2.जन्नत की आरजू में कहा जा रहे है लोग
जन्नत तो कर्बला में खरीदी हुसैन ने
दुनिया-ओ-आखरत में रहना हो चैन सूकून से
तो जीना अली से सीखे और मरना हुसैन से।।

3.सिर गैर के आगे न झुकाने वाला और नेजे पर भी कुरान सुनाने वाला, इस्लाम से क्या पूछते हो कौन है हुसैन, हुसैन है इस्लाम को इस्लाम बनाने वाला।।

4.करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने, ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने,
लहू जो बह गया कर्बला में, उनके मकसद को समझा तो कोई बात बने।।

5.खून से चराग-ए-दीन जलाया हुसैन ने, रस्म-ए-वफ़ा को खूब निभाया हुसैन ने,
खुद को तो एक बूँद न मिल सका लेकिन करबला को खून पिलाया हुसैन ने।।

6.हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
ये आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है।।

7.न हिला पाया वो रब की मैहर को, भले ही जीत गया वो कायर जंग,
पर जो मौला के डर पर बैखोफ शहीद हुआ, वही था असली और सच्चा पैगंबर।।

8.कर्बला की जमीं पर खून बहा, कत्लेआम का मंजर सजा,
दर्द और दुखों से भरा था सारा जहां लेकिन फौलादी हौसले को शहीद का नाम मिला।।

9.करबला को करबला के शहंशाह पर नाज है,
उस नवासे पर मोहम्मद को नाज़ है,
यूँ तो लाखों सर झुके सजदे में लेकिन
हुसैन ने वो सजदा किया जिस पर खुदा को नाज़ है।।

10.इमाम का हौसला इस्लाम जगा गया,
अल्लाह के लिए उसका फ़र्ज़ आवाम को धर्म सिखा गया।।

11.मुहर्रम को याद करो वो कुर्बानी,
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी,
ना डिगा वो हौसलों से अपने,
काटकर सर सिखाई असल जिंदगानी।।

12.फिर आज हक के लिए जान फ़िदा करे कोई,
वफ़ा भी झूम उठे यूँ वफ़ा करे कोई,
नमाज़ 1400 सालों से इंतज़ार में है,
हुसैन की तरह मुझको अदा करे कोई।।

13.ख़ुदा का जिस पर रहमत हो वो हुसैन होता है,
जो इन्साफ और सत्य के लड़ जाए वो हुसैन होता है।।

14.मिटकर भी मिट सके ना ऐसा वो हामी-ओ-यावर
नेज़े की नोंक पर था फिर भी बुलंद था सर।।

15.यूँ ही नहीं जहाँ में चर्चा हुसैन का
कुछ देख के हुआ था ज़माना हुसैन का
सर दे के जो जहाँ की हुकूमत खरीद ले
महंगा पड़ा यज़ीद को सौदा हुसैन का।।

16.कौन भूलेगा वो सजदा हुसैन का,
खंजरों तले भी सर झुका ना था हुसैन का
मिट गयी नसल ए याजिद करबला की ख़ाक में,
क़यामत तक रहेगा ज़माना हुसैन का।।

17.हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
ये आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है,
सबा भी जो गुजरे कर्बला से तो उसे कहता है अर्थ वाला,
तू धीरे गूजर यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है।।

18.अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से।।

19.सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गयी,
सब्र से उम्मत को ज़िन्दगी मिल गयी,
एक चमन फातिमा का उजड़ा मगर
सारे इस्लाम को जिंदगी मिला गयी।।

20.दिल से निकली दुआ है हमारी, मिले आपको दुनिया में खुशियां सारी, गम ना दे आपको खुदा कभी, चाहे तो एक खुशी कम कर दे हमारी।।

21.सजदा से करबला को बंदगी मिल गई, सबर से उम्‍मत को ज़‍िंदगी मिल गई एक चमन फातिमा का गुज़रा मगर सारे इस्‍लाम को ज़‍िंदगी मिल गई।।

22.जन्‍नत की आरज़ू में कहां जा रहे हैं लोग, जन्‍नत तो करबला में खरीदी हुसैन ने दुनिया-ओ-आखरात में जो रहना हो चैन से जीना अली से सीखो मरना हुसैन से।।

23.क्‍या हक अदा करेगा ज़माना हुसैन का अब तक ज़मीन पर कर्ज़ है सजदा हुसैन का झोली फैलाकर मांग लो मुमीनो हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का।।

24.न हिला पाया वो रब की मैहर को भले जीत गया वो कायर जंग पर जो मौला के दर पर बैखोफ शहीद हुआ वही था असली और सच्चा पैगम्बर।।

25.आंखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे ताबीर में इमाम का जलवा दिखायी दे ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी एक छोटा सा जरा दिखायी दे।।

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